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When there are so many flowers blooming...
When the air is so fragrant...
Why to bleed with thorns???

Stay Blessed and Happy....

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हरसिंगार -4

दोष हवाओं का था या फूल ही थे हल्के से,नाज़ुक से, जो सह न पाए मंद मुदित पवन का वेग भी! सुबह-सुबह चादर से कुछ दूर मिट्टी में औंधे मुँह पड़े मिले कुछ फूल... हर दिन की तरह... विरह की पीड़ा इतनी भा गई है या तुम हो मानिनी मीरा से हठीले ! हे हरसिंगार के फूल! किस आस में रात भर महकते हुए टिके रहते हो जो पौ फटते ही टूट जाती है! प्रेम में आस का टूटना स्वयं का टूटना ही तो है...

दूरदर्शन जयपुर से कविता पाठ

सृजन कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी 30 दिसम्बर 2015
मन का पिंजरा  अभिलाषाएं क़ैद उड़ना  चाहें उन्मुक्त्त गगन मे खोल दूँ पिंजरा....